पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर के 454 पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने 17 सितंबर तक रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने ये फैसला जुलाई 2026 में हुई परीक्षा में पेपर लीक और हाई-टेक नकल के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने इस पूरी चयन और नियुक्ति प्रक्रिया को फिलहाल फ्रीज कर दिया है। इस बीच एक और भर्ती प्रक्रिया पर हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगाई है। बुधवार को हाईकोर्ट ने Punjab State Rural Livelihoods Mission के तहत 41 ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर और 44 क्लस्टर कोआर्डिनेटर की भर्ती प्रक्रिया पर अगली सुनवाई 2 सितंबर तक रोक लगा दी है।
जनवरी में हुई थी परीक्षा, फरवरी में रिजल्ट
जनवरी में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी और फरवरी में इसके नतीजे घोषित हुए थे। इसके तहत 70 नंबरों का पेपर था, जबकि 10 नंबर इंटरव्यू, 10 नंबर क्वॉलिफिकेशन और 10 नंबर एक्सपीरियंस के लिए रखे गये थे। याचिकाकर्ताओं ने याचिका में कहा था कि जो नतीजे जो घोषित हुए हैं उनमें पेपर के अलावा बाकी के जो 30 नंबर हैं उन्हें लेकर स्पष्टता से नहीं बताया गया है कि किसमें कितने नंबर मिले हैं और मात्र कुल नंबर ही बताए गए हैं।
जांच में नंबर देने में अनियमितताएं
हाई कोर्ट ने सारा रिकॉर्ड तलब किया था और वकीलों और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों की एक कमेटी बनाई थी जिसने सारे रिकॉर्ड की जांच की। कमेटी ने अपनी जांच में नंबर देने में अनियमितताएं पाईं जिसके आधार पर अदालत ने भर्ती प्रक्रिया को अगली सुनवाई तक रोक दिया है।
परीक्षा में हुई नकल, 30 से ज्यादा लोग गिरफ्तार
वहीं, फार्मेसी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज फरीदकोट द्वारा 19 जुलाई को आयोजित की गई थी। इस दौरान पुलिस ने हाई-टेक गैजेट से नकल कराने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था जिसके बाद परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दायर कर इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने और नए सिरे से पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है।
दरअसल, 19 जुलाई 2026 को पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 454 फार्मेसी ऑफिसर पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) की ओर से कराई गई थी। परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल कर नकल करते पकड़ा गया था। परीक्षा में हाईटेक चीटिंग और पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद अभ्यर्थियों में आक्रोश है। छात्रों और छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए लगातार प्रदर्शन किए गए। फरीदकोट में छात्र संगठन BFUHS के बाहर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए।
पेपर लीक पर सियासत
इस रोक के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने इसे पेपर लीक का पुख्ता मामला बताते हुए आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के इस्तीफे की मांग की है। वहीं, सरकार इसे पेपर लीक नहीं बल्कि महज एक नकल का मामला बताने में लगी है।
सीएम भगवंत मान ने भी मामले पर सफाई देते हुए कहा था कि उनकी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में पंजाब में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। उनका कहना है कि जैसे ही ब्लूटूथ के जरिए नकल का मामला सामने आया, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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